
10 मार्च 2026 को देशभर में शीतला सप्तमी का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन माता शीतला की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और रोगों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
शीतला सप्तमी का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी मनाई जाती है। कई स्थानों पर इसे बसौड़ा भी कहा जाता है।
इस दिन माता शीतला को बासी भोजन (एक दिन पहले बना हुआ भोजन) का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से माता प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोग-दोष और महामारी से बचाने का आशीर्वाद देती हैं।
यह पर्व विशेष रूप से स्वास्थ्य, स्वच्छता और शीतलता का प्रतीक माना जाता है।
शीतला सप्तमी की पूजा विधि
शीतला सप्तमी के दिन पूजा करने के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं –
- सप्तमी से एक दिन पहले मीठे चावल, पूरी और अन्य पकवान बनाकर रख लें।
- सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ठंडे पानी से स्नान करें।
- घर या मंदिर में माता शीतला की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- देवी को जल, रोली, अक्षत, फूल और नीम के पत्ते अर्पित करें।
- माता को एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन भोग के रूप में चढ़ाएं।
- पूजा के अंत में माता शीतला की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
- पूजा के दौरान हुई किसी भी गलती के लिए देवी से क्षमा याचना करें।
शीतला सप्तमी पूजा मंत्र
मूल मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः॥
स्तुति मंत्र
शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता।
वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्॥
मार्जनी-कलशोपेतां शूर्पालंकृतमस्तकाम्॥
मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शीतला सप्तमी के दिन माता शीतला की पूजा और व्रत करने से रोग, संक्रमण और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा परिवार में स्वास्थ्य, सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।




